Monday, 30 November 2015

चूड़ियाँ

मैंने लोगो को कहते सुना है, हाथों में चूड़ियाँ पहन लो | इसका अर्थ है कि आपमें साहस कि कमी है और चूडि़यां पहनने वाले हाथ कमजोर है | किन्तु मैं इससे सहमत नहीं | एक भिन्न दृष्टिकोण से चूड़ियों पर उल्लेख-

बजती हैं माँ कि चूड़ियाँ,
रसोई में मेरे लिए स्वादिष्ट भोजन पकाने के लिए,
मंदिर की घंटी बजा कर मेरे लिए दुआ का हाथ उठाने के लिए |

बजती है माँ कि चूड़ियाँ,
मुझे थपकी दे कर सुलाने के लिए,
मुझ पर आशीष बरसाने के लिए |

बजती रहे ममता भरी ये चूड़ियाँ ||

बजती है बहन कि चूड़ियाँ,
मुझे सता कर अपने पीछे दौड़ाने के लिए,
मुझ से मीठी नोक-झोंक में कमर पर हाथ रख धौंस जमाने के लिए |

बजती है बहन कि चूड़ियाँ,
मेरे माथे पर चंदन का टीका लगाने के लिए,
मेरे हाथों में राखी सजाने के लिए |

बजती रहे शरारत भरी ये चूड़ियाँ ||

बजती है पत्नी कि चूड़ियाँ,
प्रतीक्षारत हाथो से दरवाज़ा खोलने के लिए,
मुझे आलिंगनबद्ध कर मनुहार जताने के लिए |

बजती है पत्नी कि चूड़ियाँ,
मेरी पसंद के पकवान बनाने के लिए,
मेरे घर आँगन को सँवारने के लिए |

बजती रहे प्रेम भरी ये चूड़ियाँ ||

बजती है बेटी कि चूड़ियाँ,
मेरे घर को अपनी किलकारियों से सजाने के लिए,
नन्हे हाथों से गुड्डे गुड़ियों संग खेलने के लिए |

बजती है बेटी कि चूड़ियाँ,
ससुराल जाते हुए छुप कर आँसू पोंछेने के लिए,
दौड़ते हुए मेरे सीने से लग जाने के लिए |

बजती रहे मासूमियत भरी ये चूड़ियाँ ||

2 comments: